यू.पी. चुनावः स्वामी प्रसाद मौर्य का भाजपा छोड़ना किस पर पड़ेगा भारी

Swami prasad Moriya

स्वामी प्रसाद मौर्य के इस्तीफ़े के एलान ने उत्तर प्रदेश के चुनावी समर में हलचल पैदा कर दी है। हालाँकि, अब देखना यह है कि स्वामी प्रसाद मौर्य का भाजपा छोड़ना भाजपा को छटका देगा या खुद मौर्य जी को ही भारी पड़ेगा। मीडिया में आई खबरो के अनुसार जैसे ही स्वामी प्रसाद मौर्य जी ने भाजपा को छोड़ने का ऐलान किया उससे अगले दिन ही उनके खिलाफ 7 साल पुराने एक मामले में मुख्य दंडाधिकारी ने गिरफ्तारी वारन्ट जारी किया है। दूसरी ओर श्री अखिलेश यादव के साथ जाएँगे या नहीं इसे लेकर रहस्य बना हुआ है। भाजपा सांसद उनकी पुत्री संघमित्रा मौर्य ने कहा है कि उनके पिता ने इस बात की घोषणा नही की है कि वह अखिलेश यादव के साथ जायेंगे। आगे की रणनीति अभि तय करना बाकी है।
कितने ताकतवर है स्वामी प्रसाद मौर्य?
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ ज़िले के रहने वाले 68 वर्षीय स्वामी प्रसाद मौर्य पिछले 30 साल से यूपी की राजनीति में सक्रिय है। ख़ास तौर से आप पिछड़े वर्ग की राजनीति के लिए जाने जाते है तथा कई समाजिक संगठनो का आपको संरक्षण प्राप्त है। साथ ही कोली समाज के साथ-साथ पश्चिम में सैनी समाज मेें भी आपका अपना बड़ा जनाधार है।

गोरखपुर के वरिष्ठ पत्रकार कहते है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आगरा से लेकर पूर्वी यूपी में गोरखपुर तक कोली समाज का विस्तार है जो कुशवाहा, शाक्य और मौर्य, कोली तथा सैनी नाम से जाने जाते हैं। माना जाता है। कि है कि स्वामी प्रसाद मौर्य इस समय गैर यादव ओबीसी वोट को लाने में मुख्य भूमिका अदा करते रहे हैं।

यूपी के आगराए जौनपुरए गाजीपुरए बलियाए मऊए कुशीनगरए गोरखपुरए महाराजगंज में मौर्य व कुशवाहा समाज की बड़ी आबादी है। इन इलाक़ों में कुछ हज़ार वोटों का अंतर निर्णायक हो जाता है।
जातिगत आंकड़ो की बात करें तो मौर्य जी का भाजपा छोड़ना भाजपा को भारी पड़ सकता है। भलंें हि भाजपा के इशारो पर मौर्य जी के खिलाफ गिरफ्तारी वारन्ट जारी कराये जाये या अन्य जाँच एजेन्सी बिठाई जायें। दोनो हाल में मौर्य जी ही भाजपा पर भारी पड़ते नजर आ रहे है।